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27/11/2025

प्रश्न-1. एशिया में जल संसाधनों के वितरण में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन की भूमिका पर चर्चा कीजिए। क्षेत्रीय सहयोग और विकास पर सीमा पार जल विवादों के क्या निहितार्थ हैं?

प्रश्न को हल करने संबंधी दृष्टिकोण-

दक्षिण एशिया में जल संसाधनों के वितरण में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

क्षेत्रीय सहयोग और विकास के संबंध में सीमापार जल विवादों के निहितार्थ पर चर्चा कीजिए।

उत्तर/

भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और चीन तक फैला हुआ गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना (GBM) बेसिन दक्षिण एशिया की एक महत्त्वपूर्ण नदी प्रणाली है। यह लाखों लोगों की कृषि, पेयजल और ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं को पूर्ण करता है, जिससे यह क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए महत्त्वपूर्ण हो जाता है। बेसिन की नदियाँ उन सघन जनसंख्या वाले और कृषि की दृष्टि से समृद्ध क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा हैं, जिनसे वे गुजरती हैं।

जल संसाधन वितरण में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन की भूमिकाः

कृषि सिंचाई: GBM बेसिन उपजाऊ सिंधु-गंगा मैदान के लिए आवश्यक सिंचाई की सुविधा प्रदान करता है, जो एक महत्त्वपूर्ण कृषि केंद्र है, तथा भारत और बांग्लादेश में पर्याप्त खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करता है।

उदाहरण के लिएः भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में गंगा नदी के जल का उपयोग गेहूं और गन्ने के खेतों के विशाल क्षेत्र की सिंचाई के लिए किया जाता है।

पेयजल आपूर्तिः यह बेसिन प्रमुख शहरी केंद्रों को पेयजल की आपूर्ति करता है, लाखों निवासियों की आवश्यक जरूरतों को पूर्ण करता है तथा शहरी विकास को सहायता प्रदान करता है।

उदाहरण के लिए: ब्रह्मपुत्र नदी भारत में गुवाहाटी और बांग्लादेश में ढाका जैसे शहरों को पेयजल उपलब्ध कराती है।

जलविद्युत उत्पादनः बेसिन की नदियों का उपयोग जल विद्युत के लिए किया जाता है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

उदाहरण के लिए: ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी पर स्थित चुखा परियोजना जैसी भूटान की जलविद्युत परियोजनाएँ भारत को विद्युत निर्यात करती हैं, जो दोनों देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं में योगदान करती हैं।

जैव विविधता का समर्थनः यह बेसिन विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र और उच्च जैव विविधता को बनाए रखता है, जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य और संरक्षण प्रयासों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए: GBM बेसिन द्वारा पोषित सुंदरबन मैग्रोव वन्यजीव संरक्षण और तटीय सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

औद्योगिक उपयोगः बेसिन की नदियाँ औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक जल उपलब्ध कराती हैं तथा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास का समर्थन करती हैं। उदाहरण के लिए: हुगली नदी, वस्त्र और इस्पात उत्पादन जैसे विविध उद्योगों के साथ एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में कार्य करती है, जैसे कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की रिफाइनरी और टाटा का स्टील प्लांट ।

मत्स्य पालन और आजीविकाः यह बेसिन व्यापक मत्स्य पालन को बढ़ावा देता है, जो स्थानीय समुदायों की आजीविका और अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए: गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी में मत्स्य पालन प्रचुर मात्रा में होता है, गंगा में 265 प्रजातियाँ और ब्रह्मपुत्र में 167 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें स्वच्छ जल और नदी के मुहाने की प्रजातियाँ दोनों शामिल हैं।

क्षेत्रीय सहयोग और विकास पर सीमापार जल विवादों के प्रभावः

राजनीतिक तनावः साझा जल संसाधनों पर विवाद प्रायः महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक संघर्ष को जन्म देते हैं, जिससे व्यापक द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होती है।

उदाहरण के लिए: भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी विवाद ने उनके कूटनीतिक संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है, जिससे व्यापार और सुरक्षा संबंधी सहयोग प्रभावित हुआ है। भरोसे की कमीः निरतंर जल विवाद पड़ोसी देशों के बीच परस्पर विश्वास को खत्म कर रहे हैं।

तथा अन्य क्षेत्रीय पहलों और मुद्दों पर सहयोग को जटिल बना रहे हैं।

उदाहरण के लिए: ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बाँध निर्माण में पारदर्शिता की कमी ने चीन और भारत के बीच संदेह और अविश्वास में और अधिक वृद्धि की है।

कानूनी समस्याएँ: देश प्रायः जल अधिकारों को लेकर लंबे समय तक कानूनी विवादों में उलझे रहते हैं, जिससे सहकारी समाधानों के प्रस्ताव और कार्यान्वयन में देरी होती है।

उदाहरण के लिए: 1960 की सिंधु जल संधि के बावजूद, जल आवंटन और बाँध निर्माण पर असहमति के कारण तनाव जारी है और सहयोगात्मक समाधानों के क्रियान्वयन में देरी हो रही है।

आर्थिक हानिः जल विवाद निचले इलाकों में जल उपलब्धता को प्रभावित करते हैं, जिससे कृषि और जलविद्युत जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र प्रभावित होते हैं, जिससे महत्त्वपूर्ण आर्थिक हानि होती है।

उदाहरण के लिए: ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बाँधों को लेकर भारत की चिंताएं पूर्वोत्तर भारत में कृषि उत्पादकता और जलवि‌द्युत परियोजनाओं को प्रभावित करती हैं, जिससे आर्थिक विकास में बाधा आती है।

विकास संबंधी देरीः अनिर्णीत जल विवादों का समाधान न होने के कारण नियोजित विकास परियोजनाओं में प्रायः देरी होती है, जिससे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक एकीकरण अवरूद्ध हो जाता है।

उदाहरण के लिए: नेपाल की महत्त्वाकांक्षी जलविद्‌युत परियोजनाएं भारत की अनुप्रवाह संबंधी चिंताओं के कारण प्रायः विलंबित हो जाती हैं, जिससे देश के आर्थिक विकास में अत्यधिक बाधा उत्पन्न होती है।

विकास संबंधी देरीः अनिर्णीत जल विवादों का समाधान न होने के कारण नियोजित विकास परियोजनाओं में प्रायः देरी होती है, जिससे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक एकीकरण अवरूद्ध हो जाता है।

उदाहरण के लिए: नेपाल की महत्त्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजनाएं भारत की अनुप्रवाह संबंधी चिंताओं के कारण प्रायः विलंबित हो जाती हैं, जिससे देश के आर्थिक विकास में अत्यधिक बाधा उत्पन्न होती है।

पर्यावरणीय क्षरणः विवादों के कारण प्रायः जल उपयोग की असंतुलित पद्धतियाँ अपनाई जाती हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को भारी क्षति पहुँचती है तथा पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन में कमी आती है।

उदाहरण के लिए: बराक नदी पर प्रस्तावित तिपाईमुख बाँध को स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता में व्यवधान सहित संभावित पारिस्थितिक क्षति के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना बेसिन दक्षिण एशिया में जल संसाधनों के वितरण के लिए महत्त्वपूर्ण है, जो लाखों लोगों को कृषि, उद्योग और दैनिक जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण जल उपलब्ध कराता है। कूटनीतिक सहभागिता और सहयोगात्मक समझौतों के माध्यम से इन विवादों का समाधान करना न्यायसंगत जल वितरण सुनिश्चित करने तथा क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।

15/05/2019

चीन-अमेरिका के बीच और बढ़ा टकराव

चीन अमेरिका के बीच और बढा टकराव, ट्रंप की व्यापार कार्रवाई की धमकी पर बिफरा चीन, कहा व्यापार युद्ध को पहुंचाएगा अंजाम तक, बाहरी दबाव में झुकने से किया इंकार.

अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनातनी और बढ़ गई है वहीं ईरान को लेकर भी अमेरिका ने अपना रुख कड़ा कर दिया है। अमेरिका ने चीन से आयातित होने वाले वस्तुओं पर शुल्क 10 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया तो चीन ने भी पलटवार करते हुए 60 अरब डॉलर की अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया। अमेरिका चीन से होने वाले शेष 300 अरब डॉलर के आयात पर भी इसी प्रकार से शुल्क बढ़ाने की तैयारी में है। ट्रंप ने अपने ट्वीट में चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया।

इस सबके बीच चीन ने कहा है कि वो अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता जारी रखेगा, और मामले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करेगा,, लेकिन चीन किसी भी तरह के व्यापार युद्ध के लिए तैयार है. चीन सरकार के प्रवक्ता गेंग सुआंग ने कहा कि हम आशा करते हैं कि अमेरिका हालात को गलत तरह से नहीं समझेगा और चीन को हलके में नहीं लेगा, ये पहले से साफ है कि चीन व्यापार युद्ध में नहीं पड़ना चाहता , लेकिन अगर उस पर युद्ध थोपा गया तो वो इसे अंत तक लड़ेगा।

वहीं ईरान के साथ भी अमेरिका की तनातनी बढ़ गई है, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है, ये बयान उस खबकर के बाद आया है, जिसमें यूएई ने होरमुज की खाड़ी में चार तेल के व्यवसायिक जहाजों को नष्ट करने की शिकायत की है, हालांकि ईरान ने इसमें अपना हाथ होने से मना किया है, अमेरिका पहले ही इस इलाके में अपना एक युद्धपोत तैनात कर चुका है, ऐसा उसने ईरान की ओर से तेल के व्यवसायिक रास्तों को बंद करने की धमकी के बाद किया था।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख फेडेरिका मोघैरिनी से मुलाकात की। बैठक के बाद मोघैरिनी ने कहा कि यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देश ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका से उम्मीद करते हैं कि वो इस मामले में संयत बरते और समझ से काम ले। यूरोपीय संघ ने अमेरिका से किसी भी सैन्य विकल्प के बारे में सोचने से बचने की सलाह दी।

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