Dharmdev enterprises

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29/01/2021

एक आम आदमी के मन में फ्लाई एश ब्रिक्स के बारे में प्रश्न होता है :-
1) क्या यह ईंट मिट्टी से बने लाल ईंट की तुलना में ज्यादा मजबूत होता है?
2) क्या इस ईंट की उम्र (life) लाल ईंट से कम होती है?
3) क्या फ्लाई एश ब्रिक्स में लाल ईंट की अपेक्षा प्लास्टर की पकड़ कमजोर होती है?
4) सभी सरकारी भवनों में फ्लाई एश ब्रिक्स का उपयोग होता है लेकिन कुछ सालों बाद भवन में (crack) दरार आ जाती है क्यों ?

अगर आप इन सभी सवालों का अपनें जवाब से ग्राहक को संतुष्ट कर सके तो निश्चय ही ईंट की बिक्री में बदलाव आऐगा।उत्तर:
1) बेशक, चूँकि फ्लाई एश ब्रिक्स 40 टन से भी अधिक प्रेशर से दबाकर बनाई जाती है, आप साउंड टेस्ट से एवं ईंट को पटक कर भी देख सकते हैं।या फिर जिनके पास strength testing machine है उससे भी टेस्ट कर सकते हैं।लाल ईट की अधिकतम दबाव क्षमता 5MPA तक ही होती है जबकि एश ब्रिक्स की 7 से 15MPA तक होती है।

2) लाल ईंट से बने धरों में अगर प्लास्टर नही किया गया हो तो 2 से 3 सालों में ही ईंट घुनले लग जाता है, जबकि एश ब्रिक्स में ऐसा नही होता। इसका कारण यह है कि इसे तैयार करते समय इसे कम से कम 7 दिन तक पानी में डूबाकर रखा जाता है और उसके बाद ईंट को 15 दिन तक धछप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस तरह फ्लाई एश ब्रिक्स को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 25 दिन का समय लगता है।

3) चूँकि फ्लाई एश के particles 200 micron के होते हैं। इस कारण इसे जब high pressure machine से अन्य सामाग्री मिलाकर दबाया जाता है इस कारण ईंट की सतह चिकनी हो जाती है, हम इसे चाह कर भी खुरदरा नही बना सकते। इसी fine particles के कारण एश ब्रिक्स ज्यादा compact होता है।
इस कारण ऐसा नही है कि इसमें प्लास्टर नही पकड़ेगा, अगर सीमेंट से बनी ईंट में सीमेंट नही पकड़ेगा तो क्या मिट्टी पकड़ेगा। प्लास्टर का असली पकड़ ईंट के चारों तरफ लगे सीमेंट रेती के गारे से होता है न कि ईंट के सतह से ।
कुछ मिस्त्री गारे की मात्रा कम करके ईंट जोड़ाई करते समय ईंट को चिपकाकर दीवाल चुनाई करते हैं इस कारण दीवाल की पूरी सतह ईंट के कारण चिकनी हो जाती है, प्लास्टर करते समय मिस्त्री दीवाल पर सीमेंट का घोल भी नही डालता। Curing भी सही होना,एवं रेत और सीमेंट प्लास्टर के समय सही अनुपात में न होना।
ऐसे मिस्त्रियों की गलती से प्लास्टर कमजोर हो जाता है और लोग ईंट को दोष देते हैं।

4) सभी सरकारी भवनों में CPWD के मानक के अनुरुप कार्य नहीं होता यह सभी जानते हैं। ठेकेदार अपनी आमदानी को बढ़ाने के लिए सस्ते से सस्ते सामाग्रियों का उपयोग करता है।

आखरी में मैं आपसे एक बात कहना चाहूंगा ईंट की quality को बेहतर से बेहरत बनाने की कोशिश करें।आपकी ईंट की quality में निम्न कारणों से भी फर्क पड़ता है::
# फ्लाई एश की quality
# रेत एवं stone dust की quality
# lime, gypsum की quality
# cement और chemical hardener की
quality
# machine की quality एवं hydrolic pressure
# mixing का तरीका
# सभी materials का सही अनुपात

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