Ajeet Kumar
06/11/2024
मेरी मां का निधन हो गया।
जीवन शून्य हो गया। मां हाजीपुर के कौनहारा में पृथ्वी-आकाश-गंगा-अग्नि-वायु में विलीन हो गई।
'ॐ देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम् । सरस्वत्यै वाचो यन्तुर्यनत्रिये, दधामि बहस्पतेष्ट्वा, साम्राज्ये नाभिषिंचाम्यसौ'
सन 1940 में इनका जन्म हुआ था। मुजफ्फरपुर से टीचर ट्रेनिंग की पढ़ाई पूरी कर प्रधान शिक्षिका के रूप ने कई विद्यालयों में सेवा दी। लेकिन हम बच्चों की जवाबदेही के कारण बीच में ही सरकारी नौकरी छोड़ दी। स्वतंत्रता सेनानी की पुत्री और पुलिस अधिकारी की पत्नी होने के बावजूद हम बच्चों की परवरिश के लिए अपना करियर खत्म कर ली। मां के तपस्या के बदौलत ही हम सभी उच्च शिक्षा को प्राप्त कर सके। चालीस से अधिक सदस्यों वाली परिवार का गठन कर उसे संजोए रखा। दैहिक रूप से आज तुम नहीं हो मां, लेकिन तुमसे उत्पन्न तुम्हारा अंश तुम्हारे उच्च आदर्श को जीवित रखेगा.....
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