Maneesh Kumar Gupta
26/12/2025
25 दिसंबर का यह दिन देश की दो महान विभूतियों के जन्म का अद्भुत सुयोग लेकर भी आता है। भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी, भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय जी, इन दोनों महापुरुषों ने भारत की अस्मिता, एकता और गौरव की रक्षा की और राष्ट्र निर्माण में अपनी अमिट छाप छोड़ी। आज लखनऊ की यह भूमि एक नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। इसकी विस्तार से चर्चा करने से पहले मैं देश और दुनिया को क्रिसमस की शुभकामनाएं देता हूँ।
आज 25 दिसंबर को ही महाराजा बिजली पासी जी की भी जन्म जयंती है। महाराजा बिजली पासी जी ने वीरता, सुशासन और समावेश की जो विरासत छोड़ी, उसे हमारे पासी समाज ने गौरव के साथ आगे बढ़ाया है। यह भी एक संयोग ही है कि श्रद्धेय अटल जी ने वर्ष 2000 में महाराजा बिजली पासी जी के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था। मैं इस महान दिन पर महामना मालवीय जी, श्रद्धेय अटल जी और महाराजा बिजली पासी जी को श्रद्धापूर्वक नमन और वंदन करता हूं।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल, उस सोच का प्रतीक है, जिसने भारत को आत्मसम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया है।
-मा. प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी
भारत माता की सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले राष्ट्र के महानायकों डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी और भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जी की त्रिवेणी स्वरूप लखनऊ के राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का अद्भुत और अलौकिक दर्शन है।
26/12/2025
पद्म विभूषण से अलंकृत, महान समाजसेवी और मानवता के सच्चे उपासक बाबा आम्टे जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन!
वंचितों, पीड़ितों और कुष्ठ रोग से ग्रस्त जनों के लिए उनका आजीवन संघर्ष सेवा, करुणा और आत्मसमर्पण की अनुपम मिसाल है। उनका जीवन हमें निःस्वार्थ सेवा और मानवीय गरिमा के संरक्षण की प्रेरणा देता है।
25/12/2025
उत्तर प्रदेश की पावन धरती लखनऊ आगमन पर विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी, आपका प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन!
देश के पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती के पावन अवसर पर भारत की लोकतांत्रिक चेतना, सुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को सुदृढ़ करने वाले ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का आपके कर-कमलों द्वारा उद्घाटन मेरे जैसे करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए अति सौभाग्य का क्षण है।
यह अवसर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, प्रखर राष्ट्रवादी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी एवं श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।
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