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मकर संक्रांति का विवरण

मकर संक्रांति एक प्रमुख हिंदू पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह त्योहार हर साल 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है और इसे फसल कटाई के उत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

मकर संक्रांति का महत्व:

1. खगोलीय महत्व – इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, यानी दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।

2. धार्मिक महत्व – इसे शुभ समय की शुरुआत माना जाता है और इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व होता है।

3. सांस्कृतिक महत्व – भारत के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे कि

उत्तर भारत – मकर संक्रांति

पंजाब – लोहड़ी

असम – भोगाली बिहू

तमिलनाडु – पोंगल

गुजरात और राजस्थान – उत्तरायण

महाराष्ट्र – तिलगुल उत्सव

मकर संक्रांति के प्रमुख आयोजन:

तिल-गुड़ का सेवन – "तिल गुड़ घ्या, गोड़ गोड़ बोला" कहकर मिठास बढ़ाने की परंपरा।

पतंग उत्सव – खासकर गुजरात और राजस्थान में पतंग उड़ाने की परंपरा।

खिचड़ी पर्व – उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा।

गंगा स्नान और दान-पुण्य – श्रद्धालु इस दिन गंगा स्नान कर दान-पुण्य करते हैं।

निष्कर्ष:

मकर संक्रांति न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी है। यह त्योहार नई ऊर्जा, समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है। 04/02/2025

मकर संक्रांति का विवरण मकर संक्रांति एक प्रमुख हिंदू पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह त्योहार हर साल 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है और इसे फसल कटाई के उत्सव के रूप में भी जाना जाता है। मकर संक्रांति का महत्व: 1. खगोलीय महत्व – इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, यानी दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। 2. धार्मिक महत्व – इसे शुभ समय की शुरुआत माना जाता है और इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व होता है। 3. सांस्कृतिक महत्व – भारत के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे कि उत्तर भारत – मकर संक्रांति पंजाब – लोहड़ी असम – भोगाली बिहू तमिलनाडु – पोंगल गुजरात और राजस्थान – उत्तरायण महाराष्ट्र – तिलगुल उत्सव मकर संक्रांति के प्रमुख आयोजन: तिल-गुड़ का सेवन – "तिल गुड़ घ्या, गोड़ गोड़ बोला" कहकर मिठास बढ़ाने की परंपरा। पतंग उत्सव – खासकर गुजरात और राजस्थान में पतंग उड़ाने की परंपरा। खिचड़ी पर्व – उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा। गंगा स्नान और दान-पुण्य – श्रद्धालु इस दिन गंगा स्नान कर दान-पुण्य करते हैं। निष्कर्ष: मकर संक्रांति न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी है। यह त्योहार नई ऊर्जा, समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है।

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