Kavi Ranjit Tiwari
22/11/2023
नमस्कार दोस्तों....
आज प्रस्तुत हूं....अपनी एक तुकबंदी कविता लेकर
हास्य का पुट है...अवश्य पढ़ें आनंदित हों और बताएं
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एक धनाढ्य की सुकुमारी थी
जॉब जॉब रटती वो कुंवारी थी
बड़े जद्दोजहद से पापा ने समझाया
सुकुमारी ने विवाह का मन बनाया
पापा ने उसकी हर शर्त पर सिर हिलाए
कुछ प्लानिंग सुकुमारी के मन में आए
वर तलाशने का अद्भुत था इंतजाम
होना था "पति" पद के लिए इंटरेंस एक्जाम
आवेदन पत्र ने ज्योहिं मार्किट में धूम मचाए
हर उम्र के इच्छा धारकों ने अपने भाग्य आजमाए
साइबर कैफे में हसरत लिए, लोग कर रहे अफरा तफरी
रिश्तेदारों से उम्मीदवारों तक ,थे सभी एक दूजे पर भारी
एक अनार सौ बीमार वाली लागू थी कहावत ---
फॉर्म भरते लोग कर रहे थे , सपनों की सजावट
पोस्टमैन परेशान, पापा हैरान ,सुकुमारी मुस्का रही थी
आए हुए आवेदनों में , सबकी बायोडाटा मिला रही थी
प्रश्न सेट- सेंटर सिलेक्ट, रिटेन एग्जाम की तैयारी भी
अंतिम दौर में शामिल हुए ,प्यारे भाई तिवारी जी
चाय गरम की आवाज सुन , सुकुमारी ने आंखे खोली
पास बैठे मुस्कुराते तिवारी जी से सपने की बात बोली
सपने की बात सुनकर दोनों जमकर खिलखिलाए
दिन की शुरुआत अच्छी हुई जब प्रातः काल मुस्काए
पति पत्नी होना जॉब नहीं ,जीवन की जरूरत है
ना अहंकार ना ईगो रूप समर्पण और चाहत है ।
------ रंजित तिवारी
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