Vidya Bharti Rajasthan

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Photos from Vidya Bharti Rajasthan's post 20/06/2026

वैदिक गणित प्रशिक्षण वर्ग नोखा

वंदना एवं बौद्धिक सत्र (20/06/26)

परिचय राजूराम जी पारीक
दुर्ग सिंह जी राजपुरोहित, विनायक जी बीकानेर विभाग प्रचारक, मदन लाल जी बिश्नोई, सुनील जी झंवर (पूर्व छात्र)
मूलचन्द जी सारस्वत, राजुराम जी, भागीरथ जी, विक्रम सिंह जी उपस्थित रहे।

बौद्धिक - विनायक जी (भारतीय जीवन के मूल्य)
1. मातृशक्ति के प्रति हमारा सम्मान ओर उनके प्रति हमारा त्याग, समर्पण ही भारतीयता है।
2. विवेकानंद जी उदाहरण देते हुए बताया कि हर क्षेत्र में नारी को माता माना है।
3. भगवान के प्रति जो सम्मान है वही सम्मान सृष्टि में मौजूद सभी प्राणियों के प्रति रखना ही भारतीय जीवन मूल्य का अभूतपूर्व उदाहरण है।
4. शिक्षक को भगवान तुल्य बताया है क्योंकि वहीं हैं जो राष्ट्र निर्माण हेतु अपने पुत्र के समान सभी विद्यार्थीयो को एक रूप से शिक्षा देता हैं।
5. भगवान राम की महिमा का मंडन किया जिसमें उनके मर्यादा, सम्मान, रामराज्य की चर्चा की।
6. व्यक्ति चरित्र से पहले राष्ट्र चरित्र का निर्माण होना अनिवार्य है तभी देश, राष्ट्र, समाज का विकास होगा।
7. व्यक्ति को निरन्तर सभी के प्रति हर परिस्थिति में सेवा भाव रखना।
8. पाश्चातय संस्कृति बताती है यही सत्य है जबकि भारतीय संस्कृति बताती है यह भी सत्य है।
9. सभी मनुष्यों, जीवों, प्रकति के प्रति भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता के भाव रखते हैं।
10. वसुधैव कुटुम्बकम् एवं सर्वे भवन्तु सुखिन के भाव रखना ही भारतीय संस्कृति है।
11. भारत के किसी भी भाग में हो रहे अन्याय के प्रति सभी का एक जुट होना ही हमारी संस्कृति को परिभाषित करता है।वंदना एवं बौद्धिक सत्र (20/06/26)
परिचय राजूराम जी पारीक
दुर्ग सिंह जी राजपुरोहित, विनायक जी बीकानेर विभाग प्रचारक, मदन लाल जी बिश्नोई, सुनील जी झंवर (पूर्व छात्र)
मूलचन्द जी सारस्वत, राजुराम जी, भागीरथ जी, विक्रम सिंह जी उपस्थित रहे।
बौद्धिक - विनायक जी (भारतीय जीवन के मूल्य)
1. मातृशक्ति के प्रति हमारा सम्मान ओर उनके प्रति हमारा त्याग, समर्पण ही भारतीयता है।
2. विवेकानंद जी उदाहरण देते हुए बताया कि हर क्षेत्र में नारी को माता माना है।
3. भगवान के प्रति जो सम्मान है वही सम्मान सृष्टि में मौजूद सभी प्राणियों के प्रति रखना ही भारतीय जीवन मूल्य का अभूतपूर्व उदाहरण है।
4. शिक्षक को भगवान तुल्य बताया है क्योंकि वहीं हैं जो राष्ट्र निर्माण हेतु अपने पुत्र के समान सभी विद्यार्थीयो को एक रूप से शिक्षा देता हैं।
5. भगवान राम की महिमा का मंडन किया जिसमें उनके मर्यादा, सम्मान, रामराज्य की चर्चा की।
6. व्यक्ति चरित्र से पहले राष्ट्र चरित्र का निर्माण होना अनिवार्य है तभी देश, राष्ट्र, समाज का विकास होगा।
7. व्यक्ति को निरन्तर सभी के प्रति हर परिस्थिति में सेवा भाव रखना।
8. पाश्चातय संस्कृति बताती है यही सत्य है जबकि भारतीय संस्कृति बताती है यह भी सत्य है।
9. सभी मनुष्यों, जीवों, प्रकति के प्रति भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता के भाव रखते हैं।
10. वसुधैव कुटुम्बकम् एवं सर्वे भवन्तु सुखिन के भाव रखना ही भारतीय संस्कृति है।
11. भारत के किसी भी भाग में हो रहे अन्याय के प्रति सभी का एक जुट होना ही हमारी संस्कृति को परिभाषित करता है।

Photos from Vidya Bharti Rajasthan's post 16/06/2026

🇮🇳 वन्दे मातरम् के 150वें गौरवशाली वर्ष एवं संत गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती को समर्पित संस्कार राजस्थान (अप्रैल, मई, जून-2026) पत्रिका का नवीन अंक।

भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक समरसता के प्रेरक विचारों से परिपूर्ण।

वंदे मातरम्।

Google Drive: संस्कार राजस्थान (अप्रैल, मई, जून-2026)

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सादर,
विद्या भारती राजस्थान
सेवाधाम परिसर, जवाहर नगर, जयपुर, राजस्थान

Photos from Vidya Bharti Rajasthan's post 16/06/2026

वर्तमान राष्ट्रीय चुनौतियों के प्रति सजग रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व – शिवप्रसाद जी
झुंझुनूं। वर्तमान समय में भारत अनेक राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों के प्रति समाज को जागरूक करने एवं नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए आयोजित बौद्धिक सत्र में शिवप्रसाद जी ने कहा कि भारत निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है और विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। भारत की बढ़ती सामर्थ्य एवं विकास को कुछ पड़ोसी देश सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण सीमाओं पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि देश के सामने बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ आंतरिक स्तर पर भी अनेक विषय चिंतन के हैं। चरित्र संकट, तुष्टीकरण की प्रवृत्ति, आतंकवाद एवं आर्थिक क्षेत्र की चुनौतियां वर्तमान समय के प्रमुख विषय हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य, कर्तव्य भावना एवं सामाजिक समरसता का होना आवश्यक है।
शिवप्रसाद जी ने कहा कि आतंकवाद जैसी समस्याओं का समाधान समाज की जागरूकता, एकता एवं राष्ट्रभावना से ही संभव है। आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी भावना, उत्पादन वृद्धि एवं सकारात्मक सोच के माध्यम से देश को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे।
इस अवसर पर राजेंद्र कुमार जी गोयन (जिला व्यवस्थापक), राजेश शर्मा (जिला सचिव झुंझुनूं), त्रिविक्रम अपूर्वा (जिला सचिव चूरू), मनीष बेदी (सह सचिव चूरू), निर्मल डूडी (प्रधानाचार्य), रमेश कुमार, सुरेश कुमार, घनश्याम जी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

वंदे मातरम्। 🇮🇳

सादर,
विद्या भारती राजस्थान
सेवाधाम परिसर, जवाहर नगर, जयपुर, राजस्थान

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302004