BSP Rajasthan
नए नए एससी लड़के सोचते है कि सुबह उठे, मूंछो पर ताव दिया, कुर्ता पजामा पहना और पूरा भारत उनकी जय जयकार करने के लिए तैयार बैठा। फिर वो दस बार गालियाँ बसपा को देगा, बहनजी की निंदा करेगा, यह कहेगा कि लगातार हार रहे है। एक शीट पर आ गए है।
जबकिं "जीत" का टारगेट अगर सामान्य व ओबीसी के लिए 100 मीटर है तो एससी/एसटी के लिए 500 मीटर है अथार्त राजनीति में शिखर पर पहुचने के लिए जो अवरोधक एससी/एसटी के सामने आते है उसका 20% भी सामान्य व ओबीसी के सामने नहीं आता है।
उदाहरण के लिए;
गुजरात के साबरकांठा के रूपाल गाँव के 35 दलित परिवार गाँव छोड़कर पलायन करना चाहते है। वो झेल रहे है;
1.दरबार व शुद्र अथार्त ओबीसी उनके खिलाफ रोजाना एटॉसिटी किसी न किसी रूप में कर रहे है।
2.मूंछे रखने पर विवाद करते है।
3.गाड़ी, मोटरसाइकिल, कार चलाने पर विवाद करते है।
4.अच्छे कपड़े पहने पर विवाद करते है।
5.कोई मेहमान उनके पास किसी अन्य जगह से आ जाये तो उसे रोककर अच्छे कपड़े पहनने पर विवाद करते है।
6.मन्दिर में जाने नही देते है (खैर, यह ठीक है)। कभी मन्दिर में भंडारा होता है तो उनके लिए अलग से इंतजाम किया जाता है। एक दो बार गलती से उनके लिए रखी प्लेट हममें से किसी ने उठा ली तो विवाद हो गया।
7.स्कूल में अलग से पानी रखा जाता हैं।
8.गाँव मे जब बारात आती है तब दलित के बारात निकालने, घोड़ी पे चढ़ने पर रोक लगा रखी है।।
9.हाल में एक एससी युवक को टैक्टर से मारने की कोशिस करी, जिसमे वीडीओ बनाने की वजह से उंसकी जान बच गयी।
10.आरक्षण की वजह से गाँव का सरपंच भी एससी है लेकिन उसका कहना है कि वो नाममात्र का सरपंच है। सभी एससी के गांव छोड़ने पर वो भी गांव से चला जाएगा।
यह अकेले गुजरात के एक गाँव की कहानी नही है, बल्कि भारत कर लगभग 80% गाँवो की कहानी है। 20% भी वो गाँव है जँहा एससी बाबा साहब, मान्यवर कांशीराम साहब की बहुजन विचारधारा के बाद धर्मिकता को छोड़कर मनोबला अर्जित कर लिए है।
इसलिए इस भारत के गाँवो में दलितो को ऊपर वर्णित क्रम 1 से 10 तक मे जिन शब्दों, एट्रोसिटी झेलना पड़ रहा है, उनकी पार्टी को कौन वोट देगा।
लेकिन यह मान्यवर साहब, बहनजी, बसपा की चतुराई व स्ट्रेटजी है कि ऐसे वातावरण में भी वोट लेकर 4 बार सरकार बना ली व देश की तीसरी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी बना दी।
इसलिए एससी राजनीति में जितना प्राप्त कर सकते थे, उससे 1000% ज्यादा बसपा ने काफी कम समय मे प्राप्त कर लिया, जिसके कारण एससी युवा जँहा गाँवो में हाथ जोड़कर बाउजी कहकर खड़ा रहता था, अब मूंछों पर तांव देकर बुलेट से चल रहा है।
विकास कुमार जाटव
28/05/2026
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