Kesar direct dil se
15/09/2025
Must read..*...A lovely poem from Gulzar...*
कुछ हँस के
बोल दिया करो,
कुछ हँस के
टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत
परेशानियां है
तुमको भी
मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले
वक्त पे डाल दिया करो,
न जाने कल कोई
हंसाने वाला मिले न मिले..
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो !!
समझौता
करना सीखिए..
क्योंकि थोड़ा सा
झुक जाना
किसी रिश्ते को
हमेशा के लिए
तोड़ देने से
बहुत बेहतर है ।।।
किसी के साथ
हँसते-हँसते
उतने ही हक से
रूठना भी आना चाहिए !
अपनो की आँख का
पानी धीरे से
पोंछना आना चाहिए !
रिश्तेदारी और
दोस्ती में
कैसा मान अपमान ?
बस अपनों के
दिल मे रहना
आना चाहिए...!
- गुलज़ार😊
Subah subah Dil kuch shayarana ho raha hai Zara gaur farmaiye
मसरूफ ज़िंदगी से कभी वक़्त निकाल पाए तो बादल और आसमान की दोस्ती देखिये.. पानी ओर नाव, रेगिस्तान ओर हवा, कान ओर संगीत, पेड़ ओर परिंदे, किताब ओर पाठक की दोस्ती को महसूस किजिए... पानी ओर मटके की दोस्ती निहारिए, आंख ओर आंसू के साथ को दिल की नज़र से देखिये... कायनात की जादुगरी मेहसूस होगी..... अहसास की खुशबु तक चले दोस्त.... रूह से मेहसूस करे.... एक मुकम्मल एहसास है दोस्ती.... 👍🙏👍
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