Masihat
I will sing of the mercies of the Lord for ever I will sing.
23/12/2021
हम में से कई लोंगो के लिए क्रिसमस एक अवकाश या ईसाइयों का एक त्योहार है । दुर्भाग्यवश उसमें से कई लोग क्रिसमस का सही अर्थ नहीं जानते ।कई परिवार क्रिसमस के विशेष रीति रिवाज़ और परंपराएं को ही पूरी करने में व्यस्त हो जाते है , जिसमें घरो की सजावट , भोजन ,मौज मस्ती , सांता क्लाज और प्रियजनों के साथ उपहारों का आदान प्रदान इत्यादि शामिल है । वहीं दूसरी ओर मौज मस्ती करने वालों को क्रिसमस एक बहाना मिल जाता है और ऐसे लोग होटलों में शराब और नाच गानो द्वारा जस्न में डूब जाते है । ये सारी बातें उतनी ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है जितना की सही अर्थों में क्रिसमस का महत्व जानना । और हरेक को समझना चाहिये की क्रिसमस आख़िर है क्या ?
क्रिसमस का सही अर्थ क्या है ?
क्रिसमस का सही अर्थ है परमेश्वर का मनुष्यों से प्रेम करना ।परमेश्वर ने अपने प्रेम को इस तरह से संसार प्रकट किया । बाइबल हमें बताती है की “ परमेश्वर ने जगत से इतना प्रेम किया की उसने यीशु मसीह को (जो कि परमेश्वर का ही एक रूप है) हमारे लिए दे दिया ताकि जो कोई उसपर विश्वास करे वह नाश ना हो परंतु अनंत जीवन पाए ।
इसलिए क्रिसमस वास्तव में परमेश्वर का यीशु के रूप में जन्म लेकर मनुष्यों को जीवन दान देना है ।हम सब जानते हैं की मनुष्य का ये जीवन दुःख से भरा , पाप से ग्रसित और अशांति से भरा है । इसलिए वह एक ऐसे जीवन की तलाश में है जो उसको शांति , सुकून और अपराध भावना से छुटकारा दे । वह हर तरह से जी जान लगाकर कर एसे जीवन को खोज रहा है। लेकिन उसको निराशा ही मिली है ।
क्रिसमस , मनुष्य की इसी आवश्यकता को पूरी करने का सुनहरा अवसर है । परमेश्वर ने मनुष्य की दशा को समझ कर उसकी सुखमय जीवन को पाने की असफल कोशिशों को यीशु मसीह में पूरी करने के लिए यीशु को संसार में भेजा । ताकि जो कोई भी यीशु पर विश्वास करे वो जीवन पाए और भरपुरी का जीवन पाए। बाइबल हमें बताती है कि यीशु मसीह ने लोगों से कहा की “ मैं जगत में इसलिए आया की लोग जीवन पाए और भरपुरी का जीवन पायें । परमेश्वर ने यीशु को संसार में भेजकर अपने प्रेम को हम मनुष्यों पर प्रगट किया।
अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हूवा । जिसके बारे में हम बाइबल में पढ़ते हैं कि यीशु के जन्म के क़रीब सात सौ साल पहले ही परमेश्वर ने अपने भविष्यवक्ताओं को येसंदेश दे दिया था कि आगे चलकर एक उद्धारकर्ता जन्मेगा जो एक कुंआरी से जन्म लेगा और उसका नाम इम्मानुएल अर्थात परमेश्वर हमारे साथ है , रखा जाएगा।
यही बात दो हज़ार साल पहले पूरी हुई जब यीशु ने जन्म लिया जिसका संदेश स्वर्गदूतों ने गड़रियों को दिया और कहा कि देखो तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है और यही मसीह प्रभु है और इसका तुम्हारे लिए ये पता है कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चर्नी में पड़ा पाओगे ।
अपने जन्म के बाद जब वह युवा हुआ तो मानव सेवा में लग गया । उसने गरीब, दुखी और बीमारों को गले लगाया उनकी बीमारी से उनको मुक्त किया । उसने यह बात सार्वजनिक तौर पर कही “ मैं सेवा करवाने के लिए नहीं बल्कि सेवा करने के लिए आया हूँ ।” जो लोग समस्याओं के और परेशानियों के बोझ से दबे थे उनको निमन्त्रण दे कर कहा “ हे सब थके और बोझ से दबे लोगों मेरे पास आवो में तुम्हें विश्राम दूँगा ।”
जो लोग गुनाहों में फँस गए या दुनिया के मायाजाल में खो गए उनसे उसने बड़े शांतिदायक शब्दों द्वारा कहा “ मैं खोए हुवों को ढूँढने और उनका उद्धार करने आया हुँ।
यीशु ने यह भी कहा की “ मार्ग सत्य और जीवन मैं ही हुँ।” मैं जगत में इसलिए आया की लोगों को जीवन दूँ और भरपुरी का जीवन दूँ।”
क्रिसमस यंही खतम नहीं हो जाता बल्कि यह एक शुरुआत है मनुष्य के उत्थान और उद्धार की।
यीशु की अपनी इस नयी जीवन शैली और शिक्षावों ने धर्म अगुवों की नींद उड़ा दी और उन्होंने यीशु को मार डालने की योजना बनाई और उसको एक दिन झूठे दोष लगाकर पकड़ कर अदालत में अपने पैसे और पावर का ज़ोर दिखा कर उसे क्रूस पर चडा कर मार डालने की सजा दे दी।
निर्दोष होने पर भी यीशु ने क्रूस पर से यह विनती की “हे पिता इन्हें क्षमा कर क्योंकि ये नहीं जानते की ये क्या कर रहे हैं।” यीशु का जन्म , क्रूस की मृत्यु तक की एक येसी इतिहासिक घटना है जो मानव जाति के उद्धार और उत्थान के लिए घटी । इसलिए क्रिसमस को केवल एक त्योहार के तौर पर मनाना काफ़ी नहीं है ।उसके मक़सद को भी समझना ज़रूरी है।
लेकिन अफ़सोस इस बात का है की आज लोग क्रिसमस को केवल मौज मस्ती का ही ज़रिया बना कर साल दर साल मनाते रहते है । इस से उनके जीवन में कोई फ़ायदा नहीं होगा । यदि लोग सचमुच जीवन का आनंद और ख़ुशी चाहते है तो इस त्योहारी मानसिकता को बदलना होगा और क्रिसमस के यीशु को अपनाना होगा । क्योंकि यीशु बिना क्रिसमस का कोई अर्थ नहीं है।
क्या आप सचमुच क्रिसमस को सच्चे अर्थ में जीना चाहते है तो यीशु को आपको जानने की ज़रूरत है।
आप इस सबंद में और जानकारी चाहते हैं तो आप समपर्क करें - रेवह. विश्वास मसीह- 9425320598
Masihat will be soon launching its website with sermons and content that will help you in growing in Christian faith.
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the place of worship
Telephone
Website
Address
452016