Jassi Petwar
12/05/2026
युवाओं के भविष्य का बंटाधार,
यही तो है भाजपा सरकार..!
85 पदों पर भर्ती निकालकर प्रदेश के युवाओं को सपने दिखाए गए, सैकड़ों अभ्यर्थियों ने वर्षों की मेहनत, संघर्ष और उम्मीदों के साथ HPSC Assistant Professor Psychology की परीक्षा दी। प्री परीक्षा पार करने के बाद 320 से अधिक अभ्यर्थी सब्जेक्टिव एग्जाम में बैठे, लेकिन परिणाम ऐसा आया कि पूरे हरियाणा में केवल 3 अभ्यर्थी ही 35% का मानदंड पार कर पाए। प्रश्न यह है कि क्या वास्तव में 320 से अधिक युवाओं में केवल 3 ही योग्य थे…? क्या शेष सभी अभ्यर्थी अयोग्य थे, या फिर व्यवस्था की कसौटी ही इतनी संकुचित कर दी गई कि प्रतिभा उसमें समा ही नहीं पाई…?
यह परिणाम केवल एक परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का प्रतिबिंब है जहाँ युवाओं की मेहनत और भविष्य दोनों अनिश्चितता के हवाले दिखाई दे रहे हैं। 85 पदों के लिए भर्ती निकालना और अंततः केवल 3 अभ्यर्थियों को योग्य बताना, प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। यदि यही स्थिति रही तो प्रदेश का युवा परीक्षा से पहले मेहनत नहीं, बल्कि परिणामों से भय खाना शुरू कर देगा।
हरियाणा सरकार और HPSC को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर मूल्यांकन की ऐसी कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें सैकड़ों मेहनती युवाओं की योग्यता एक झटके में नकार दी गई। पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा होती है, इसलिए उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया, मार्किंग नीति और चयन मानदंड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। क्योंकि जब युवाओं का विश्वास टूटता है, तब केवल परिणाम नहीं बिगड़ते, व्यवस्था की विश्वसनीयता भी कठघरे में खड़ी हो जाती है।
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