Islamic Knowledge
13/06/2026
शामली के आयुष मलिक और पाकिस्तान की सीमा हैदर के मामलों में अलग-अलग रवैया देखने को मिला। 4 बच्चों की माँ सीमा हैदर 2023 में पाकिस्तान से अवैध तरीके से भारत आई, सचिन से शादी की और हिंदू धर्म अपना लिया। इसके बाद हिंदूवादी संगठनों ने उसका सम्मान किया और प्रशासन ने भी धर्मांतरण या ब्रेनवॉश जैसे आरोपों में कोई कार्रवाई नहीं की।
वहीं आयुष मलिक के मोहम्मद अली बनने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने दबाव बनाया और प्रशासन ने चांदनी व उसके परिवार पर धर्मांतरण, ब्रेनवॉश और पैसे के लालच के आरोप लगाकर कार्रवाई की। जबकि आयुष मलिक लगातार कहता रहा कि चांदनी बेगुनाह है और उसने अपनी मर्जी से, वर्षों तक इस्लाम का अध्ययन करने के बाद इस्लाम स्वीकार किया है।
जब कोई मुस्लिम हिंदू बनता है तो प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, लेकिन जब कोई हिंदू मुस्लिम बनता है तो अलग रवैया अपनाया जाता है, जबकि संविधान सभी को अपनी पसंद का धर्म अपनाने और उसके प्रचार-प्रसार का अधिकार देता है।
01/09/2025
हजरत उमर (रज़ि)
बहुत समय पहले की बात है। हज़रत उमर (रज़ि.) एक बार रात को मदीना की गलियों में घूम रहे थे ताकि लोगों की हालात देख सकें। चलते-चलते उन्होंने एक छोटे से घर से एक औरत और उसकी बेटी की बातें सुनीं।
वह औरत अपनी बेटी से कह रही थी:
“बेटी! दूध में थोड़ा पानी मिला दो, ताकि ज्यादा हो जाए और सच्ची ईमानदारी की कहानी
बहुत समय पहले की बात है। हज़रत उमर (रज़ि.) एक बार रात को मदीना की गलियों में घूम रहे थे ताकि लोगों की हालात देख सकें। चलते-चलते उन्होंने एक छोटे से घर से एक औरत और उसकी बेटी की बातें सुनीं।
वह औरत अपनी बेटी से कह रही थी:
“बेटी! दूध में थोड़ा पानी मिला दो, ताकि ज्यादा हो जाए और हम ज़्यादा बेच सकें।”
बेटी ने कहा:
“अम्मी! अमीर-उल-मोमिनीन (हज़रत उमर रज़ि.) ने ऐलान किया है कि दूध में पानी मिलाना मना है। यह धोखा है।”
माँ बोली:
“अरे! इस वक़्त उमर कहां देख रहा है? वो तो यहाँ नहीं है।”
बेटी ने बड़े अदब से कहा:
“अम्मी! उमर तो नहीं देख रहे, लेकिन अल्लाह तो देख रहा है।”
हज़रत उमर (रज़ि.) यह सुनकर बहुत खुश हुए और घर लौट आए। अगले दिन उन्होंने उस ईमानदार लड़की का निकाह अपने बेटे आसिम से कर दिया।
उसी नेक लड़की की नस्ल से आगे चलकर उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह पैदा हुए, जिन्हें “दूसरा उमर” कहा जाता है और इस्लामी इतिहास के सबसे आदर्श खलीफ़ाओं में गिना जाता है।
हज़रत उमर (रज़ि.) यह सुनकर बहुत खुश हुए और घर लौट आए। अगले दिन उन्होंने उस ईमानदार लड़की का निकाह अपने बेटे आसिम से कर दिया।
उसी नेक लड़की की नस्ल से आगे चलकर उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह पैदा हुए, जिन्हें “दूसरा उमर” कहा जाता है और इस्लामी इतिहास के सबसे आदर्श खलीफ़ाओं में गिना जाता है।
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