Dr. Rajeev Raj

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Photos from Dr. Rajeev Raj's post 23/06/2026

कौन अपना है कौन पराया है। इन्सान सारी उम्र यही गणित लगाता रहता है। जबकि अधिकांश लोगों का सच यही है कि जीवन के अनजाने पथ पर कब कौन कितने सुकून के पल सौंप दे, कब कौन सा पहर यादगार बना दे, किसी को नहीं पता। यही अनिश्चितता तो असली आनंद है। राजधानी दिल्ली में जहाँ निजी समीकरणों को साधते साधते इंसान कब मशीन बन जाता है उसे ख़ुद पता नहीं चलता वहाँ कोई बेहद आत्मीय भाव से न केवल आपका आतिथ्य सत्कार करे वरन् अपनी सारी व्यस्तताएँ दरकिनार कर आपके लिए समय निकाले तब लगता है कि यही तो वो अपनापन है जिसकी ख़्वाहिश में रिश्तों के न जाने कितने जाल अब तक बुन डाले।
सरल और हँसमुख मनीषा इंजीनियर हैं, BHEL में सेवारत हैं, साहित्यिक गतिविधियों में भी पर्याप्त सक्रियता है। चिराग की रचनात्मकता का कौन मुरीद नहीं। उसकी व्यस्तता भी आसानी से समझी जा सकती है। लेकिन एक निजी यात्रा के दौरान उनके घर जाने पर जो अपनापन महसूस हुआ उसने न केवल कवि परिवार शब्द को सार्थक किया बल्कि स्नेह का ऋणी भी बना लिया। आनंद का प्लावन तो तब हुआ जब मालूम हुआ कि मनीषा-चिराग़ की वैवाहिक वर्षगाँठ है। ये महज़ एक संयोग नहीं हो सकता क्योंकि ऐसे अवसरों का साक्षी होना ही एक अदृश्य लेकिन अहम् रिश्ते का प्रमाण पत्र माना जा सकता है। विभिन्न विषयों पर लंबी सार्थक चर्चाओं के दौरान मनीषा के हाथ का स्वादिष्ट भोजन, अहा !
इस यात्रा के हासिल के रूप में और भी बहुत कुछ है जो क्रमश: साझा करूँगा।
पहले क़ीमती अध्याय के बहुमूल्य क़िरदार
आप दोनों का दाम्पत्य जीवन ऐसे ही प्रतिपल और और रसमय होता रहे। आप दोनों को असीम मंगलकामनाएँ 💐💐💐💐

Chirag Jain
Manisha Shukla

20/06/2026

नियतिवाद, भाग्यवाद, प्रारब्ध कर्म जैसी अनेक दार्शनिक विचारधाराएँ कहती हैं कि ब्रह्मांड में हर घटना (इंसान की गतिविधियां, फैसले, भविष्य) कारणों की श्रृंखला से पहले से तय होती है। इंसान को लगता है कि वह स्वतंत्र फैसले ले रहा है, लेकिन वास्तव में सब कुछ पूर्व-निर्धारित है। मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है।आप माने या न माने पर सच यही है। जैसे कोई अदृश्य डोर कतपुतली को नचाती है ठीक वैसे ही मैं भी बिना किसी ख़ास काम के एक ऐसी यात्रा पर निकल पड़ा जिसकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। हाँ, इतना ज़रूर है कि दो तीन दिन से मन कुछ बेचैन सा था, पर क्यों ? नहीं पता। बस एक बहाना मिला और हम निकल पड़े। यूँ ही बेसबब, बेमक़सद।
मानसी के पास बैठने का मन ज़रूर था, यश के लिए भी मन कुछ परेशान सा था पर ये सब किसी यात्रा को प्रारम्भ करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं कहे जा सकते। लेकिन जब यहाँ आ गया और मोबाइल उठाया तब इस पूरी ऊहापोह का कारण समझ में आ गया।
आज एक ऐसी लड़की का जन्म दिन है जो न केवल गंगाजल सी निर्मल मन है वरन् सबके लिए कल्याणमयी भावनाओं से ओतप्रोत भी। सबका भला सोचने वाली प्रेम और ममता से परिपूर्ण। ये अलग बात है विगत कुछ वर्षों से वो कभी तन के तो कभी जीवन के बेहद कठिन दौर से गुज़री है लेकिन मुझे पक्का विश्वास है कि जैसे तन की जंग जीती है, जीवन की भी जीतेगी। तपस्या के ये दिन शीघ्र ही पूरे होंगे और ये सुंदर सी बहादुर लड़की अपनी नैसर्गिक मुस्कुराहट की ख़ुशबू बिखेरती नज़र आएगी। बहरहाल, हम उसका जन्म दिन मनाने के लिए आ चुके हैं।
अरे ! आप लोग मेरी कहानी ही पढ़ते रहेंगे या रेखा जी को जन्म दिन की बधाई भी देंगे 😊
जन्म दिन की खूब खूब शुभकामनाएँ रेखा ! 💐💐💐💐💐💐💐

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