Shwetabh Pathak
22/06/2026
सभी को राधे राधे 🙏🙏💐
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज जी के सानिध्य में हमारे अगले वर्ष तक के आगामी कार्यक्रम।
शरद पूर्णिमा पंच दिवसीय श्वेत प्रेम रस महोत्सव वृंदावन में 24 अक्टूबर से 28 अक्टूबर,2026 आयोजित किया जाएगा।
सभी अपना रजिस्ट्रेशन शीघ्र करवा लीजिए ।
कुछ स्थान ही बचे हैं।
वरना बाद में सभी को अपने आवास निवास की व्यवस्था स्वयं देखनी होगी क्योंकि वृंदावन में तुरंत में निवास मिलना अति दुष्कर है।
साथ ही साथ बड़ा महंगा भी होता है।
पांच दिवसीय समागम, शुल्क 5500 रुपये।(आवास, तीन समय भोजन प्रसादी)
गूगल लिंक पर जाकर फॉर्म भरिए और रजिस्ट्रेशन कीजिए। रजिस्ट्रेशन शुल्क 1,000rs.
www.shwetpremras.in
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSfdVisOA5VWNJVfuvSFqaJU-bTm8BGG0kcRgOmh_YejnT50Ng/viewform
गूगल फॉर्म👆👆
Shwetabh Pathak
22/06/2026
नारीस्तनभरनाभीदेशम्, दृष्ट्वा मागा मोहावेशम् ।
एतन्मान्सवसादिविकारम्, मनसि विचिन्तय वारं वारम् ।।
भजगोविन्दं भजगोविन्दं, गोविन्दं भजमूढमते ।
नामस्मरणादन्यमुपायं, नहि पश्यामो भवतरणे ।।
स्त्री शरीर पर मोहित होकर आसक्त मत हो। अपने मन में निरंतर स्मरण करो कि ये मांस-वसा आदि के विकार के अतिरिक्त कुछ और नहीं हैं ।।
गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो क्योंकि भगवान के नाम जप के अतिरिक्त इस भव-सागर से पार जाने का अन्य कोई मार्ग नहीं है ।
Shwet Prem Ras
22/06/2026
मोहिं पिय बिनु कछु न सुहाये री !
पिहु पिहु टेरत जबहिं पपीहा , पिय पिय नाम सुनाये री !
कुहूँ कुहूँ कूक कोयलिया बोलत , हूक करेजे उठाये री !
चारु चन्द्र की चाँदनी शीतल , तन और मन सुलगाये री !
जल बरसत जब सावन भादों , विरहा अगनि लगाये री !
कुसुमित जबहिं वसंत वाटिका , मन प्रदेश कुम्हलाये री !
वारि पूर्ण घनश्याम मेघ लखि , श्वेत मेघ बन जाये री !
अब तो “श्वेत” मन जहँहि लखहु तहँ , कण कण कृष्ण लखाये री !
- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )
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भावार्थ :: एक श्याम प्रेम विरह से व्याकुल होकर विरहिणी अपनी सखी से कहती है कि अब मुझे बिना श्यामसुंदर के कुछ भी अच्छा नहीं लगता !
जब पपीहा पिहू पिहू बोलता है तो ऐसा लगता है मानो वह भी विरह से व्याकुल होकर पिय पिय की आवाज लगाकर बुला रहा हो !
कोयल की कूक भी अब मुझे अच्छी नहीं लगती बिना श्यामसुंदर के , उसकी कूक ऐसी लगती है मानो ह्रदय को कोई बेंध रहा हो !
ये चन्द्रमा की शीतल चाँदनी भी मेरे तन और मन को और सुलगा देती है !
जब वर्षा ऋतु में सावन और भादों का जल बरसता है तो वह और विरह की ज्वाला को प्रज्वलित कर देती है !
वसंत में जब वाटिका में फूल खिलते हैं तो श्यामसुंदर के वियोग और विरह में मेरा मन और ह्रदय कुम्हला जाता है !
जल से भरे काले काले बादल भी मुझे सफ़ेद बादल के समान प्रतीत होते हैं जिनमें जल का अभाव होता है !
अब तो श्यामसुंदर के वियोग में यह स्थिति आ गयी है कि जहां भी देखती हूँ , मुझे कण कण में बस कृष्ण कृष्ण ही नज़र आते हैं !
Moral :: प्रियतम के अभाव में संसार की समस्त आनंद देने वाली वस्तुएं भी दुखदाई सी लगती हैं ! मन जब तक प्रसन्न है तब तक यह संसार प्रसन्न दीखता है , मन उदास है तो सम्पूर्ण संसार सारहीन लगता है !
"चित्तमेव ही संसारः "
सब कुछ मन ही है ! सम्पूर्ण संसार मन पर आश्रित है !
" मिलन में प्रियतम एक ही जगह दिखाई पड़ता है परन्तु विरह में प्रियतम सर्वत्र दिखाई पड़ता है , इसीलिए विरह मिलन से श्रेष्ठ माना गया है ! "
Shwet Prem Ras
भगवान के प्रति कैसे भगवद भाव बनाएं??
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज द्वारा रहस्य उद्घाटन।
www.shwetpremras.in
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