Harendra Kumar
30/04/2026
.. पूरे भारत में बढ़ते पारा और .. ऊंची इमारतों में आगजनी की घटनाएं...इसके लिए मैने आज से कई साल पहले कहानी लिखी हुई है "हवा में घर"... इंटरनेट पर सर्च करे और पढ़े जरूर।
गांव के पुस्तैनी जमीन बेचने के बाद ... शहर में सेटल होकर हम शान समझते है... पुरखों के यादों को संजो कर रखो। ..मुझे याद है जेठ, बैसाख वाले महीने में "माँ" घर को गोबर से लिप देती थी.. उस धरती की ठंडक आज के बीमार करने वाले "AC" के ठंडक से कई गुणा ज्यादा आराम देह था... स्वर्ग वाले दिन थे।
.. निकम्मों..अपने अपने हिस्से के कम से कम एक पेड़ लगाओ जैसे...अपने पीढ़ी को बढ़ा रहे हो.. ठीक उसी तरह ।
.मैने अपने हिस्से का नींव लगा दिया है....हर साल और लगाऊंगा..... मै जग गया हूं..... विश्वास है आप भी जागेंगे।
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