Arjun Bind
23/04/2025
पाहलगाम की वादियों में नफरत की गूंज...
सिर्फ नाम पूछा गया, धर्म पूछा गया… और फिर छीन ली गई एक हँसती-खेलती ज़िंदगी।
शादी के लहंगे की चमक अभी फीकी भी नहीं पड़ी थी,
मेहंदी का रंग हाथों से गया नहीं था…
पर सुहाग उजड़ गया।
किसी की नई-नई दुनिया बसने से पहले ही उजड़ गई,
किसी माँ की दुआ, किसी पिता की उम्मीद,
एक पल में खत्म हो गई।
न कोई हथियार था उनके पास, न कोई गुनाह…
फिर भी बना दिए गए निशाना।
ये हमला नहीं था सिर्फ गोली से—ये हमला था भरोसे पर, मोहब्बत पर, इंसानियत पर।
क्या सिर्फ नाम और धर्म अब मौत की वजह बनेंगे?
दिल रोता है… इंसाफ चाहिए।
Delhi Traffic 🚦
Click here to claim your Sponsored Listing.