Krishna Mohan

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21/10/2025

आज हम सभी Gmail का इस्तेमाल रोज़ करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इसकी शुरुआत कैसे हुई?

💡 Gmail की शुरुआत 1 अप्रैल 2004 को Google ने की थी।
शुरुआत में यह सिर्फ invite-based service थी — यानी कोई नया यूज़र तभी जुड़ सकता था जब किसी पुराने यूज़र ने उसे invite किया हो!

📨 Gmail की सबसे बड़ी खासियत थी इसका 1GB free storage, जो उस समय बाकी ईमेल सेवाओं से बहुत ज़्यादा था।
धीरे-धीरे यह दुनिया की सबसे पॉपुलर ईमेल सेवा बन गई।

आज Gmail सिर्फ मेल भेजने का तरीका नहीं, बल्कि एक digital identity बन चुका है! 🌍

20/10/2025

बिहार चुनाव 2025 : NDA का सीट बंटवारा तय

बिहार में एनडीए (NDA) ने विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीटों का फॉर्मूला तय कर लिया है।
👉 बीजेपी (BJP) और जेडीयू (JDU) दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।
👉 छोटे दलों के लिए नया फार्मूला अपनाया गया है — “1 सांसद = 6 विधानसभा सीटें”।

📌 इस फॉर्मूले के तहत:
• लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) : 5 सांसद × 6 = 30 सीटें (29 सीटें दी गईं)
• हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) : 6 सीटें
• आरएलएम (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) : 6 सीटें

🤝 इस बार बीजेपी और जेडीयू ने बराबर-बराबर सीटें लेकर गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।
2020 में जहां जेडीयू को 115 और बीजेपी को 110 सीटें मिली थीं, वहीं इस बार दोनों ने कुछ सीटें छोड़कर छोटे दलों को साथ रखने की रणनीति अपनाई है।

19/10/2025

क्या आप जानते हैं कि अमेरिकी डॉलर सिर्फ अमेरिका की करेंसी नहीं है, बल्कि दुनिया में सबसे ज्यादा स्वीकार की जाने वाली मुद्रा है? आइए जानते हैं इसकी कहानी:

🔹 20वीं सदी की शुरुआत: पहले विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने अंतरराष्ट्रीय विश्वास हासिल करना शुरू किया।

🔹 दूसरा विश्व युद्ध के बाद: 1944 में ब्रेटन वुड्स समझौते ने डॉलर को वैश्विक वित्तीय प्रणाली की रीढ़ बनाया, इसे सोने से जोड़ा गया और “वर्ल्ड रिज़र्व करेंसी” बना।

🔹 1971 के बाद: जब अमेरिका ने गोल्ड स्टैंडर्ड छोड़ दिया, तब भी डॉलर का प्रभुत्व बना रहा।

🔹 आज: दुनिया के लगभग 60% विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर में रखे जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, चाहे तेल हो या टेक्नोलॉजी, ज्यादातर डॉलर में होता है।

💡 मज़ेदार तथ्य: कई देशों के पास अपनी मजबूत करेंसी होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए वे बड़ी मात्रा में डॉलर रखते हैं!

डॉलर की यह यात्रा दिखाती है कि विश्वास, स्थिरता और आर्थिक ताकत किसी मुद्रा को वैश्विक बना सकती है।

#अमेरिकी_डॉलर #विश्व_अर्थव्यवस्था #डॉलर_इतिहास #वैश्विक_मुद्रा

18/10/2025

बहुत समय पहले, जब पाकिस्तान नहीं बना था, तो काबुल से पेशावर तक की ज़मीन एक ही इलाका थी। लोग एक ही भाषा बोलते थे, परंपराएं साझा करते थे, और परिवारों के रिश्ते पहाड़ों के उस पार भी जुड़े हुए थे।

लेकिन 1893 में इतिहास बदल गया।
ब्रिटिश अधिकारी सर मोर्टिमर डुरंड ने एक लाइन खींची — जिसे आज डुरंड लाइन कहा जाता है। इसने जमीन को ब्रिटिश इंडिया और अफगानिस्तान के बीच बाँट दिया।

समस्या यह थी कि इस लाइन ने पश्तून जनजातियों की ज़मीन को काट दिया और परिवारों को अचानक अलग कर दिया।
जब पाकिस्तान 1947 में बना, डुरंड लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा बन गई।

तब से, यह सीमा तनाव और भावनाओं की कहानियों से भरी रही।
अफगानिस्तान ने कभी आधिकारिक तौर पर इसे स्वीकार नहीं किया, जबकि पाकिस्तान इसे कानूनी सीमा मानता है।
और आज भी, इस लाइन के दोनों ओर रहने वाले लोग रोज़ एक-दूसरे से मिलते हैं — सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि भाई।

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