Critical thinking and analysis
Andhvishwas se kamaayi gayi sampatii
बिल्कुल। नदी खुद गंदी नहीं होती, लोग गंदा करते हैं।
यमुना में प्लास्टिक, पूजा सामग्री, कचरा, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट कोई भगवान या नदी नहीं डालती—इंसान डालता है।
अगर कोई कहे कि "नदी पवित्र है", तो सबसे पहले उसे नदी को साफ रखने की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। केवल पूजा करने से नदी साफ नहीं होती, बल्कि:
कचरा न फेंकना
सीवेज ट्रीटमेंट करना
प्लास्टिक कम करना
प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई करना
यही असली सम्मान है।
एक लाइन में:
"नदियाँ गंदी नहीं हैं, उन्हें गंदा करने वाली हमारी आदतें हैं।"
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