Mohd Atif

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उत्तराखंड का गाँधी है

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जेएनयू पर हमला देश पर हमला।आर्किटेक्ट आतिफ
पीस एम्बेसडर आर्किटेक्ट मोहम्मद आतिफ ने जेएनयू के छात्रों द्वारा किये जा रहे आंदोलन को सही ठहराते हुए कहा कि जेएनयू के छात्रों की मांगे जायज़ है और उसपर ध्यान दिया जाना चाहिए।
आतिफ ने कहा कि जेएनयू की हास्टल फीस में हुई बढ़ोतरी के साथ साथ सीबीएसई, आईआईटी,नवोदय विद्यालय और उत्तराखंड में मेडिकल कॉलेज में बढ़ायी गयी फीस को खारिज़ किया जाना चाहिए व भारत के अन्य विश्विद्यालय में भी फीस कम की जानी चाहिए।
आतिफ ने साथ ही कहा कि देश मे विदेशी विश्विद्यालय नही खुलने चाहिए और पब्लिक फंडेड यूनिवर्सिटी पर प्रहार नही होना चाहिए।
आतिफ ने बताया कि जेएनयू मुक्त विचारधारा के लिये देश मे विख्यात है
जब लेफ्ट के नेता सीताराम येचुरी जेएनयू में पढ़ते थे तब उन्होंने इंदिरा गांधी का विरोध किया था।
वहाँ पर सत्ता के खिलाफ सवाल उठाने की परिपाटी रही है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल में भी जब वह जेएनयू केम्पस में आये उनके खिलाफ प्रदर्शन हुए।लेकिन 2014 के बाद से जब नरेंद्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने देशभक्ति की ऐसी नयी भावना जागृत हुई कि सवाल उठाने वाले देशद्रोही नज़र आने लगें।
2016 में अफ़ज़ल गुरु की फांसी की बरसी पर प्रदर्शन के दौरान ऐसी घटना हुई जिसकी सत्यता की जांच कोई नही कर पाया।
और जेएनयू के छात्रों पर चेनलो ने टुकड़े टुकड़े गैंग होने का तमगा ही लगा दिया।
आतिफ ने इसे एक साजिश करार देते हुए कहा कि जेएनयू को कमज़ोर करने का मतलब देश को कमज़ोर करना है।क्योंकि जेएनयू को कमज़ोर करने का सीधा मतलब है सेंस ऑफ इक्वलिटी को कमज़ोर करना है,सेंस ऑफ जस्टिस को कमज़ोर करना,लोकतंत्र को कमज़ोर करना,देश का सेक्युलर क्रेडेंशियल है उसे कमज़ोर करना है क्योंकि जेएनयू के छात्रों के अंदर ही वोह ताकत है जो सादे चप्पल पहनकर भी कई लाख का सूट पहने व्यक्ति पर उंगली उठाकर सवाल कर सकते है।
कुछ ही सालो में सोशल मीडिया पर इस तरह का दुष्प्रचार किया गया जिसने जेएनयू के कल्चर पर ही प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए।और बची कसर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी ने पूरी कर दी बरसो तक हास्टल में पड़े रहते है,सेक्स और ड्रग्स में डूबे रहते है,जनता के पैसे पर पढ़ते है जैसी मनगढ़ंत बातो ने ये भूला दिया कि यहाँ से कितने सरकारी अधिकारी और रिसर्चर निकले तमाम रैकिंग में नम्बर वन आने की बाते भी दब गई।
हद तो यह है कि अब जेएनयू कहते ही लोगो की जुबान पर कुछ ही शब्द आते है जिनका ईमानदारी,आधुनिकता से कोई लेना देना नही है,जेएनयू से पढ़े छात्रों का नोबल प्राइज़ लाना वर्तमान में जेएनयू के ही प्रोडक्ट का वित्तमंत्री रहना भी लोगो की कल्पना को लगाम नही दे पा रहा।
जेएनयू की इमेज को तथाकथित लोगो ने पोर्न साइट सी बना दी है।
जिसको सुधारना अब स्वाभाविक हो गए है अन्यथा जेएनयू की तरह ही देश के उच्च संस्थानों को इसी तरह बरबाद करने की नाकाम साजिश की जाएगी।

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