Kanchan Rathore
25/12/2024
लघु कथा ( खाद्य सुरक्षा)
फोन की रिंग साइलेंट कर के,
मैने किताब हाथ में ली ही थी,
की हांफते हांफते पड़ोस के
सेठ जी ने बेल बजा दी,
और साथ में चिल्लाए भी जा रहे है...
सरपंच साब।
ओ सरपंच ...ऊंचा हो काई?
पहले तो मैने आना कानी की रहने देती हु,
चले जाएंगे बेल बजा कर बहार नहीं झांकूगी तो अपने आप चले जाएंगे।
लेकिन वो चिल्लाए जा रहे थे,
लगातार ,
सरपंच साब ,ओ सरपंच साब ,
मायने कोनी काई?
यकायक मेरी भी जिज्ञासा जैसे बढ़ गई कि ,इतना क्या जरूरी काम आन पड़ा इन्हें की ये इस तरह से लगातार आवाजे दिए का रहे है।
फोन हाथ में लिया तो,
20 मिस कॉल।
मेरा माथा ठनका की कुछ इमरजेंसी है,मैं फटाफट नीचे गई दरवाजा खोला,और पूछा क्या हुआ बा सा।
आप परेशान क्यों हो??
अरे साब हो अखबार भणयो?
सरकार गरीबा रो गेहूं बंद करी रि है, म्हारा भी गेहूं बंद व्हाई जाई काई?
मुझे मन ही मन इतना गुस्सा आ रहा था,कि ये बात कहने के लिए यहां आए है सेठ जी।
( गरीब का राशन खाने के लिए कितने मरे जा रहे है साले)
मैने बोला हा,
जिनके पास चार पहिया वाहन है,और सरकार का राशन गरीब बन कर उठा रहे है,
उनके गेहूं बंद कर रही है सरकार।
उसने फिर पूछा महका भी वेई काई?
इस बार मुझे गुस्सा आ गया तो मैने बोला हा आपके भी होंगे । और आपके तो सरकार रिकवरी भी निकालेगी आपके पास तो मासिक आय दस लाख से ज्यादा है,आपके पास दो दो चो पहिया वाहन है, आप इतने समृद्ध परिवार से है और तो और आप आयकर भी भरते है,गेहूं तो बंद होंगे लेकिन रिकवरी भी निकालेगी,( मैने तीर में तुक्का फेंका)
उसके चेहरे के हाव भाव पहले लाचार बेचारे वाले थे ,अब डर के मारे ,बोला हम.. हमारा तो नाम कटवा देना आप।
कैसे भी कर के आपको लेना देना हो तो बोल देना लेकिन करवा जरूर देना।
हाथ जोड़ कर सेठ जी वही बैठ गए।
मैने उन्हें चाय पिलाई और सांत्वना दी कि जो होगा देखा जाएगा।
वो शांत होकर चले गए ।
अगले ही दिन अखबार में हेडिंग थी,
"जो खायेगा गरीबों का राशन,
उसे छोड़ेगा नहीं प्रशाशन।"
मैं अचंभे में पड़ गई कि ,मैने तो तुक्के मारे थे और आज ये खबर आ भी गई।
सोच ही रही थी कि सोनी जी फिर दरवाजे के बाहर बेल बजा रहे थे।
सरपंच साब ...
ओ सरपंच साब।
✍️कंचन राठौड़ "कुंदन"
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