Poetry

Poetry

Share

24/01/2025

मूक संसृति आज है, पर गूँजते हैं कान मेरे,
बुझ गया आलोक जग में, धधकते हैं प्राण मेरे।

मौन या एकांत या विच्छेद क्यों मुझको सताए?
विश्व झंकृत हो उठे, मैं प्यार के उस गान में हूँ!

मैं तुम्हारे ध्यान में हूँ!

- अज्ञेय

Photos from Poetry's post 18/01/2025

खर्चों में जो भी बचाया जा सकता है। वह बचाने की कोशिश हमेशा रहती है। ताकि कुछ ऐसा ख़रीद सकूं, जो मुझे खर्च होने से बचा ले।

24/12/2024

जो सैंटा था, वो बचपन का झूठा वादा है
यह बात जानने का दर्द बहुत ज्यादा है

- दिव्यांश पाठक

#कविता

25/10/2024

सबसे मिलना और अपने आप को बचाना भी
हमको तन्हाई भी चाहिए था और जमाना भी

- दिव्यांश पाठक

Want your school to be the top-listed School/college in Basti?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Address

Pragati Maidan
Basti
110001