Adab Ke Sitare
तुझे न आएगी मुफलिस की मुश्किलात समझ
मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूं बात समझ
उमैर नजमी
14/11/2025
वो और मोहब्बत से मुझे देख रहा हो
क्या दिल का भरोसा मुझे धोका ही हुआ हो
होगा कोई इस दिल सा भी दीवाना कि जिस ने
ख़ुद आग लगाई हो बुझाने भी चला हो
इक नींद का झोंका शब-ए-ग़म आ तो गया था
अब वो तिरे दामन की हवा हो कि सबा हो
दिल है कि तिरी याद से ख़ाली नहीं रहता
शायद ही कभी मैं ने तुझे याद किया हो
'ज़ेब' आज है बे-कैफ़ सा क्यूँ चाँद न जाने
जैसे कोई टूटा हुआ पैमाना पड़ा हो
ज़ेब गौरी
06/11/2025
Ye sach hai....... Bilkul sach.
Yaani 16 aana sach.
05/11/2025
दिल ने बर्बाद कर दिया मुझ को
दिल के सीने में दिल नहीं होता
Dr. Nasir Naqvi
04/11/2025
जले चराग़ बुझाने की ज़िद नहीं करते
अब आ गए हो तो जाने की ज़िद नहीं करते
किसी की आँख में आँसू हमें पसंद नहीं
दिलों के ज़ख़्म दिखाने की ज़िद नहीं करते
तुम्हारे नाम का भी ज़िक्र हो न जाए कहीं
ग़ज़ल के शेर सुनाने की ज़िद नहीं करते
हमारे साए भी रस्ते में छोड़ जाते है
हमारा साथ निभाने की ज़िद नहीं करते
ख़ला में कोई इमारत कभी नहीं टिकती
वहाँ मकान बनाने की ज़िद नहीं करते
ये शहर-ए-संग है पत्थर के लोग रहते हैं
यहाँ पे फ़ूल खिलाने की ज़िद नहीं करते
ज़मीन जैसा कहीं चाँद भी न हो जाए
ज़मीं पे चाँद को लाने की ज़िद नहीं करते
चांदनी पांडे
#दिल #ज़ख्म #पत्थर #फूल #चांद #शायरी
02/11/2025
उर्दू अदब के लिहाज़ से बशीर बद्र एक अहम और बहुत मशहूर ग़ज़ल गो शायर हैं। उन्होंने उर्दू ग़ज़ल को आम ज़िंदगी के जज़्बात, मोहब्बत, जुदाई, यादें और इंसानी रिश्तों से जोड़ा। उनकी शायरी का लहजा नर्म, सादा और दिल को छू लेने वाला है। उनकी ग़ज़लों में सीधी बात में गहरी भावना झलकती है। उर्दू अदब में उन्हें जदीद (आधुनिक) ग़ज़ल का बड़ा शायर माना जाता है।
पेश है बशीर साहब की एक ग़ज़ल
वो ग़ज़ल वालों का उस्लूब समझते होंगे
चाँद कहते हैं किसे ख़ूब समझते होंगे
इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
मैं समझता था मोहब्बत की ज़बाँ ख़ुशबू है
फूल से लोग उसे ख़ूब समझते होंगे
देख कर फूल के औराक़ पे शबनम कुछ लोग
तिरा अश्कों भरा मक्तूब समझते होंगे
भूल कर अपना ज़माना ये ज़माने वाले
आज के प्यार को मायूब समझते होंगे
उस्लूब -- शैली, ढंग, आचरण, तर्ज़ ए अमल
औराक़ -- पन्ने, पृष्ठ
मक्तूब -- ख़त, चिट्ठी
मायूब -- ख़राब, बुरा,
आपको बशीर बद्र साहब का कौन सा शेर सबसे ज्यादा पसंद है कमेंट में ज़रूर बताएं
01/11/2025
मजाज़!!! जिनके अल्फ़ाज़ आज भी मुस्कुरा उठते हैं
फ़िल्मी अख़बार के एडिटर मजाज़ से इंटरव्यू लेने के लिए मजाज़ के होटल पहुँच गए... उन्होंने मजाज़ से उनकी पैदाइश, उम्र, तालीम और शायरी वग़ैरा के मुताल्लिक़ कई सवालात करने के बाद दबी ज़बान में पूछा, “मैंने सुना है क़िबला, आप शराब बहुत ज़्यादा पीते हैं। आख़िर इसकी क्या वजह है?”
“किस नामाक़ूल ने आप से ये कहा कि मैं शराब पीता हूँ।” मजाज़ ने कहा।
“तो फिर आप सिगरेट कसरत से पीते होंगे?”
“नहीं मैं सिगरेट भी नहीं पीता, शराबनोशी और सिगरेट नोशी दोनों ही बुरी आदतें हैं और मैं ऐसी किसी बुरी आदत का शिकार नहीं।” मजाज़ ने जवाब दिया।
एडिटर ने संजीदा लहजे में पूछा, “तो आप में कोई बुरी आदत नहीं है?”
मजाज़ ने उतनी ही संजीदगी से जवाब दिया, “मुझमें सिर्फ़ एक ही बुरी आदत है... कि मैं झूट बहुत बोलता हूँ।”
आपको ये किस्सा कैसा लगा कमेंट में जरूर बताएं
एक दिन जबकि आफ़ताब ग़ुरूब हो रहा था, सय्यद सरदार मिर्ज़ा, मीरज़ा ग़ालिब से मिलने को आये। जब थोड़ी देर के बाद वो जाने लगे तो मीरज़ा साहिब ख़ुद शम्मा लेकर फ़र्श के किनारे तक आये ताकि सय्यद साहिब अपना जूता रोशनी में देखकर पहन लें। उन्होंने कहा, “क़िबला! आपने क्यों तकलीफ़ फ़रमाई? मैं जूता ख़ुद ही पहन लेता।” मीरज़ा साहिब बोले, “में आपका जूता दिखाने को शम्मा नहीं लिया, बल्कि इसलिए लाया हूँ कि कहीं आप मेरा जूता न पहन जाएं।”
बहुत ही ख़ूबसूरत और नफ़ासत भरी तहरीर है 👏
इसमें मज़ाहिया अन्दाज़ भी है और ग़ालिब की शख़्सियत की नज़ाकत भी झलकती है — उनकी ज़ेहनियत, ज़राफ़त और ज़बान का लुत्फ़ साफ़ महसूस होता है।
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