Kailash Gupta

Kailash Gupta

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01/05/2026

आज की शिक्षा व्यवस्था में अधिकारी की जवाबदेही, शिक्षक की भूमिका, ग्रामीण परिवेश की वास्तविकताएँ, सीमित संसाधन और अभिभावकों की झूठी प्रतिष्ठा—ये सभी मिलकर बच्चों के सीखने के स्तर को प्रभावित करते हैं। आलोचनात्मक दृष्टि से देखें तो समस्या किसी एक पक्ष में नहीं, बल्कि उस असंतुलन में है जहाँ ऊपर से लक्ष्य और आँकड़ों का दबाव है, नीचे संसाधनों की कमी और सामाजिक अपेक्षाओं का बोझ। कई अभिभावक वास्तविक सीखने के बजाय अंकों और दिखावे को प्राथमिकता देते हैं, जिससे बच्चों की समझ कमजोर रह जाती है। ऐसे में शिक्षक अक्सर व्यवस्था के दबाव में नवाचार नहीं कर पाते।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सच्चाई को अधिक समय तक छिपाया नहीं जा सकता—वह व्यवहार, समझ और परिणामों में स्पष्ट दिखाई दे ही जाती है। इसलिए दिखावे के बजाय वास्तविक सीखने पर ध्यान देना ही आवश्यक है।
समाधान तभी संभव है जब अधिकारी जमीनी सच्चाई को समझकर सहयोगी भूमिका निभाएँ, अभिभावक दिखावे से ऊपर उठकर सीखने को महत्व दें और शिक्षक को विश्वास व स्वतंत्रता मिले। तभी शिक्षा वास्तविक अर्थों में ज्ञान, कौशल और चरित्र निर्माण का माध्यम बन सकेगी।
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