Hindu Festivals

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Photos from Hindu Festivals's post 17/04/2024

राम नवमी विशेष: अयोध्या रामलला के ललाट पर विशेष यंत्र द्वारा सूर्य तिलक किया गया। सूर्य की किरणें जैसे ही रामलला के ललाट पर पड़ी उनका ललाट जगमग हो उठा और सूर्य तिलक से पहले राम लला का दिव्य श्रृंगार किया गया।

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04/05/2023

नरसिंह जयन्ती

नरसिंह जयन्ती बृहस्पतिवार, मई 4, 2023 को
नरसिंह जयन्ती सायंकाल पूजा का समय - 04:18 पी एम से 06:58 पी एम
अवधि - 02 घण्टे 40 मिनट्स

नरसिंह जयंती हिन्दू धर्म में एक महत्वूपर्ण दिन व त्योहार माना जाता है। नरसिंह भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु आधे शेर और आधे मानव के रूप में अवतार लिया था। नरसिंह अवतार में उनका चेहरा और पंजे सिंह की तरह थे और शरीर का बाकी हिस्सा मानव की तरह था। नरसिंह जयंती को हिन्दू धर्म में एक त्योहार की तरह मनाया जाता है। यह त्योहार वैशाख मास के शुक्ल की चतुदर्शी के दिन मनाया जाता है। इसी दिन नरसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप नाम के राक्षस को वध किया था। सभी विष्णु भक्त इस दिन व्रत भी करते हैं।

नरसिंह भगवान, हिन्दू तिथि चतुर्दशी को सूर्यास्त के समय प्रकट हुए थे और इसीलिए सूर्यास्त के समय भगवान नरसिंह पूजा की जाती है। नरसिंह जयंती का उद्देश्य अधर्म को दूर करना और धर्म के मार्ग पर चलना है। धर्म सही कर्म करना है और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना है।

भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार क्यो लिया था?

भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार अपने भक्त प्रहलाद के रक्षा के लिया था। प्रहलाद के पिता जो कि एक राक्षस थे उसका नाम हिरण्यकश्यप था। हिरण्यकश्यप ने अधर्म के सभी सीमायें पार कर थी। जब हिरण्यकश्यप ने अपने ही पुत्र प्रहलाद को मारना चाहा था। हिरण्यकश्यप ने भगवान ब्रह्मा से ये वरदान मांगा था कि ’’मैं किसी भी निवास के भीतर व बाहर, दिन में व रात में, ना आकाश में व ना जम़ीन पर, ना मानव से व ना जानवर से, ना देव से व ना राक्षस से, मृत्यु को प्राप्त ना हुँ’’। ऐसा वरदान मिलने पर हिरण्यकश्यप अपने को अजय समझने लगा और भगवान विष्णु से धृणा करने लगा था और अपने आपको भगवान समझने लगा। परन्तु हिरण्यकश्यप का पुत्र विष्णु भक्त था, इसलिए हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद का वध करना चाहा था। प्रलाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था।

नरसिंह भगवान के नाम
नरसिंह भगवान को नरहरि, उग्र विर माहा विष्णु, हिरण्यकशिपु अरी के नाम से भी जाना जाता हैं।

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