Kripa shankar Pandey ayodhya
18/04/2025
६. गणेशकवचम् गौर्युवाच नाशयत्यहो । एषोऽतिचपलो दैत्यान् बाल्येऽपि अग्रे किं कर्म कर्तेति न जाने मुनिसत्तम ! ॥ १ ॥ दैत्या नाना-विधा दुष्टाः साधुदेवद्रुहः खला । अतोऽस्य कण्ठे किञ्चित्त्वं रक्षार्थं बडुमर्हसि ॥ २॥ मुनिरुवाच ध्यायेत् सिंहगतं विनायकममुं दिग्बाहुमाद्ये युगे त्रेतायां तु मयूरवाहनममुं षड्बाहुकं सिद्धिदम् । द्वापरे तु गजाननं युग-भुजं रक्ताङ्गरागं विभुं तुयें तु द्विभुजं सिताङ्गरुचिरं सर्वार्थदं पानु परमात्मा विनायकं शिखां अतिसुन्दरकायस्तु मस्तकं ललाटं कश्यपः पातु भ्रूयुगं नयने भालचन्द्रस्तु तु सर्वदा ॥ ३ ॥ परात्परः । सुमहोत्कटः ॥४॥ महोदरः । गजास्यस्त्वोष्ठपल्लवौ ॥ ५ ॥ जिह्वां पातु गणक्रीडश्चिबुकं गिरिजासुतः । वाचं विनायकः पातु दन्तान् रक्षतु विघ्नहा ॥ ६ ॥श्रवणी पाशपाणिस्तु नासिकां चिन्तितार्थदः ।...
गणेशकवचम् - Raghav Puja ६. गणेशकवचम्
08/04/2025
दुर्गा चालीसा – माँ दुर्गा की महिमा दुर्गा चालीसा कैसे करें दुर्गा चालीसा का पाठ: दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा को समर्पित 40 पंक्तियों का एक भक्तिपूर्ण पाठ है, जो शक्ति, साहस और सुरक्षा प्रदान करता है। इसे रोज़ सुबह या शाम पढ़ने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। दुर्गा चालीसा के लाभ:...
दुर्गा चालीसा | Durga Chalisa in Hindi – माँ दुर्गा की चालीसा पढ़ें - Raghav Puja कैसे करें दुर्गा चालीसा का पाठ:
07/04/2025
श्रीहरिव्यासदेवजी श्रीहरिव्यासदेवजी बिदित बात संसार संत मुख कीरति गावै ॥ बैरागिन के बंद रहत सँग स्याम सनेही । ज्यों जोगेस्वर मध्य मनो सोभित बैदेही ॥ श्रीभट्ट चरन रज परस तें सकल सृष्टि जाकों नई । हरि ब्यास तेज हरि भजन बल देबी कों दीच्छा दई ।। ७७ ।। श्रीहरिव्यासजीने भगवद्भजनके तेज और बलसे देवीको भी मन्त्रोपदेश दिया था। अपनी दिव्यगतिसे काशमें विचरण करनेवाली देवी मनुष्यकी शिष्या बनीं, यह सुनकर नितान्त ही आश्चर्य होता है, किंतु यह सच है, सारे संसारमें यह बात प्रसिद्ध है एवं सन्तजन श्रीमुखसे श्रीहरिव्यासदेवाचार्यजीकी इस कीर्तिका गान हते हैं। परम स्नेही श्रीसर्वेश्वरभगवान्का डोला एवं संसारसे वैराग्यपूर्वक भगवान् श्रीश्यामसुन्दरके श्रीचरण-लोंमें अनुराग करनेवाले विरक्त महात्माओंका समूह सदा ही आपके साथ बना रहता था। विरक्तोंके बीचमें की ऐसी शोभा होती थी....
श्रीहरिव्यासदेवजी - Raghav Puja श्रीहरिव्यासदेवजी
05/04/2025
अथ श्रीविपरीत-प्रत्यङ्गिरा-स्तोत्रम अथ श्रीविपरीत-प्रत्यङ्गिरा-स्तोत्रम अथ श्रीविपरीत-प्रत्यङ्गिरा-स्तोत्रम अथ श्रीविपरीत-प्रत्यङ्गिरा-स्तोत्रम महात्म्य एवं विधि यदि सभी कार्य विपरीत हो रहे हों, अपने प्रिय लोग, पारिवारिक जन भी रूठे हों, अच्छे कार्य का परिणाम अशुभ मिल रहा हो, किसी ने कुछ प्रयोग कर दिया हो पैशाचिकी बाधा, गृह बाधा, देवबाधा तथा शत्रु बाधाओं से पीडित हों सर्वत्र अपने आप को चारों ओर से असहाय समझ रहे हों, अकारण शत्रुता, कलंक या अनाचार थोपा जा रहा हो, एकाएक संग्राम सामने आ पड़ा हो, जंगल में अग्नि में या रण में भीति हो रही हो तो विपरीत प्रत्यङ्गिरा स्तोत्र का पाठ ही ऐसा है....
अथ श्रीविपरीत-प्रत्यङ्गिरा-स्तोत्रम - Raghav Puja अथ श्रीविपरीत-प्रत्यङ्गिरा-स्तोत्रम
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