Kavi Sudhir Ranjan

Kavi Sudhir Ranjan

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31/12/2022

अभी अभी एक छंद मां वाणी की कृपा से पूरा हुआ. जस का तस मने बिना किसी सुधार के आपकी अदालत में...

काया जैसे खाली थैला लैला लैला बोले छैला,
कोई तो बताये इन्हें प्रीत नही बिकती.

बालिका विद्यालय के गेट पर घूम घूम,
रोज दिल हारे किन्तु जीत नही मिलती.

सींकिया कलाइयों में छल्ला सदा सोहता है,
उल्लुओं की आंख में नींद नहीं दिखती.

संभलेगा देश कैसे बोलो इन युवाओं से,
जिनकी कमर पर जींस नहीं टिकती.
*सुधीर रंजन द्विवेदी*
कवि व पत्रकार

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