Manoj Kumar
23/07/2024
21/06/2024
सम्राट असोक महान मौर्य ने सिर्फ 84,000 स्तूप चैत्य ही नही बनाया, उन्होंने 52 ,00,000 लाख स्क्वायर किलोमीटर भारत का क्षेत्रफल भी बनाया जिसे अखंड भारत कहां जाता था
नालंदा तक्षशिला विक्रमशिला जैसे कई विश्वविद्यालय बनावाए
थे जिससे विदेश से लोग शिक्षा ग्रहण करने भारत आते थे !
ईसा पूर्व भारत में 500 BC से बौद्ध सभ्यता थी कोई भी भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता था.!
सिकंदर आया लेकिन सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से डर कर भाग गया. सम्राट असोक महान के दौर में भारत पर हमला करना तो छोड़ो, विदेशी राजाओं को यह डर सताए रहता था कहीं सम्राट असोक महान उनके साम्राज्य पर आक्रमण ना कर दें
सेंट्रल एशिया पूरा गंधारा, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, नेपाल, म्यांमार, सब भारत का अभिन्न अंग थे.!
इसलिए कहा जाता है 👇
था सूर्य चमकता मौर्यो का घनघोर बदरिया डरती थी
था शेर गरजता सीमाओ पर बिजली भी आहें भरती थी
जय सम्राट............................🦁
Great Samrat Ashoka
#मराठा #राजपूताना
12/06/2024
सिकंदर को हराने वाली कठगणराज्य की राजकुमारी कार्विका
राजकुमारी कार्विका सिंधु नदी के उत्तर में कठगणराज्य की राजकुमारी थी। राजकुमारी कार्विका बहुत ही कुशल योद्धा थी। रणनीति और दुश्मनों के युद्ध चक्रव्यूह को तोड़ने में पारंगत थी। राजकुमारी कार्विका ने अपने बचपन की सहेलियों के साथ फ़ौज बनाई थी।
जिस उम्र में लड़कियाँ गुड्डे गुड्डी का शादी रचना खेल खेलते थे उस उम्र में कार्विका को शत्रु सेना का दमन कर के देश को मुक्त करवाना, शिकार करना इत्यादि ऐसे खेल खेलना पसंद थे। राजकुमारी धनुर्विद्या के सारे कलाओं में निपुण थी, दोनो हाथो से तलवारबाजी करते मां कालीका प्रतीत होती थीं।
कुछ साल बाद जब भयंकर तबाही मचाते हुए सिकंदर की सेना नारियों के साथ दुष्कर्म करते हुए हर राज्य को लूटते हुए कठगणराज्य की ओर आगे बढ़ रही थी, तब अपनी महिला सेना जिसका नाम राजकुमारी कार्विका ने चंडी सेना रखी थी जो कि ८००० से ८५०० विदुषी नारियों की सेना थी, के साथ युद्ध करने का ठाना।
३२५ (इ.पूर्व) में सिकन्दर के अचानक आक्रमण से राज्य को थोडा बहुत नुक्सान हुआ पर राजकुमारी कार्विका पहली योद्धा थी जिन्होंने सिकंदर से युद्ध किया था। सिकन्दर की सेना लगभग १,५०,००० थी और कठगणराज्य की महज आठ हज़ार वीरांगनाओं की सेना थी जिसमें कोई पुरुष नहीं जो कि ऐतिहासिक है।
सिकंदर ने पहले सोचा "सिर्फ नारी की फ़ौज है, मुट्ठीभर सैनिक काफी होंगे” पहले २५००० की सेना का दस्ता भेजा गया उनमे से एक भी ज़िन्दा वापस नहीं आ पाया। राजकुमारी की सेना में ५० से भी कम वीरांगनाएँ घायल हुई थी पर मृत्यु किसी को छु भी नहीं पायी थी।
दूसरी युद्धनीति के अनुसार सिकंदर ने ४०,००० का दूसरा दस्ता भेजा उत्तर पूरब पश्चिम तीनों और से घेराबन्दी बना दिया परंतु राजकुमारी सिकंदर जैसे कायर नहीं थी खुद सैन्यसंचालन कर रही थी उनके निर्देशानुसार सेना ने तीन भागो में बंट कर लड़ाई किया और सिकंदर की सेना पस्त हो गई।
तीसरी और अंतिम ८५,०००० दस्ताँ का मोर्चा लिए खुद सिकंदर आया। नंगी तलवार लिये राजकुमारी कार्विका ने अपनी सेना के साथ सिकंदर को अपनी सेना लेकर सिंध के पार भागने पर मजबूर कर दिया। इतनी भयंकर तबाही से पूरी तरह से डर कर सैन्य के साथ पीछे हटने पर सिकंदर मजबूर हो गया।
सिकंदर की १,५०,००० की सेना में से २५,००० के लगभग सेना शेष बची थी, हार मान कर प्राणों की भीख मांग लिया सिकंदर ने और कठगणराज्य में दोबारा आक्रमण नहीं करने का लिखित संधी पत्र दिया राजकुमारी कार्विका को।
इस महाप्रलयंकारी अंतिम युद्ध में कठगणराज्य के ८,५०० में से २७५० साहसी वीरांगनाओं ने भारत माता को अपना रक्ताभिषेक चढ़ा कर वीरगति को प्राप्त कर लिया। जिसमे से इतिहास के दस्ताबेजों में गरिण्या, मृदुला, सौरायमिनि, जया यह कुछ नाम मिलते हैं।
नमन है ऐसी वीरांगनाओं को
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