Knitting Cuddles
11/23/2024
I extend an invitation to you all to attend The People’s Market & Exchange on November 30th at Terwilligar Recreation Centre, Edmonton, and explore my hand-knitted collections of reasonably priced baby-soft wool sweaters. Blankets etc.
11/23/2024
I invite you to view my collection of hand-knitted soft wool sweaters/jumpers for kids, reasonably priced, at People's Market & Exchange, Terwillegar Recreation Centre, on November 30th.
सभी बंधू-बांधवों को धनतेरस पर्व की बधाई, शुभ कामनाएं ! पर्व और उसके मनाने की बहु प्रचलित विधि मेरी कलम से - सुमन भटनागर
धनतेरस
हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान् धन्वंतरि भगवान विष्णु के अवतार हैं और उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा जगत का प्रवर्तक भी माना जाता है | हिन्दू मान्यता के अनुसार आयुर्वेद आदिकाल से प्रचलित और प्रामाणित रोग उपचार पद्धति मानी जाती है, जिसका विवरण पुराणों में भी आदि काल से पाया जाता है | ऐसी मान्यता है कि कार्तिक माह की कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन के समय भगवन धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, अतः इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है | धन्वंतरि महाराज की पूजा करने का ध्येय ईश्वर से समस्त विश्व को निरोग तथा समग्र मानव समाज को रोग विहीन करने और दीर्घायु प्राप्त करने की प्रार्थना है |
धनतेरस पंच दिवसीय दीपावली महोत्सव का प्रथम पर्व भी है । धन्वंतरि महाराज के द्वारा अमृत कलश का ध्यान करते हुए इस दिन पीतल धातु का बर्तन खरीदने की प्रथा है | चांदी / सोने आदि के जेवर /बर्तन भी बहुत लोग अपनी सामर्थ अनुसार अपने धन को सुरक्षित प्रयोग और बचत के लिये क्रय करके रखते हैं | ऐसा करने से वर्ष भर सुख-समृद्धि बनें रहने का प्रचलन माना जाता है |
सामग्री: स्टील, पीतल या चांदी का नया बर्तन, खील, आटा, सरसों का तेल, दीया -बत्ती, दियासलाई, रोली, कलावा आदि |
विधि : धनतेरस खुशियों का पर्व दीपावली के आगमन की पर्व श्रंखला का प्रथम दिन होने के कारण इस दिन तक घर की साफ़ -सफाई, रंग-रोगन आदि निपटा लिए जाते हैं | प्रातः नित्यक्रम स्नान-ध्यान से निर्वत्त होकर भगवान धन्वंतरि की पूजा आरती परिवार के सभी सदस्यों के साथ विधि विधान से करें | तत्पश्चात पूजा हेतु नया बर्तन पीतल/चांदी/ कांसा आदि का खरीद लाएं | चांदी/ सोने के सिक्के/ जेवर का क्रय भी सामर्थ / धनाढ्य लोगों द्वारा किया जाता है | महंगाई के इस युग आम आदमी परिपाटी को निभाने के लिए बाजार में उपलब्ध सस्ते स्टील बर्तन भी क्रय करते हैं |
अहोई अष्टमी, करवा-चौथ की पूजा किये गए स्थान पर सूर्य के ढलने के उपरान्त बर्तन को खील से भरकर रखा जाता है | पूजा के स्थान पर माँ लक्ष्मी का चित्र अथवा कलैंडर लगाकर उसके सामने आटे से चौक बनाकर हल्दी और रोली से इच्छा अनुसार सजा दें | नए लाये गए बर्तन में खीलें भरकर वहां पर रख दें | सरसों के तेल के तथा एक देशी घी का दिया जलाएं | पहला पूजन स्थल, दूसरा (देशी घी) घर में लगे तुलसी पौधे के पास तीसरा एवं चौथा घर के मुख्य द्वार, पांचवां घर में से बाहर निकलने वाली नाली, छठा दिया शौचालय, सातवां रसोई में रख दें | तत्पश्चात पूजा स्थल पर सब मिलकर पूजा करें |
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